अपने टाइम के इंतजार में विपक्ष की भूमिका भूल बैठी कांग्रेस सरकार

  • by Yogesh
  • September 3, 2019

कांग्रेस पार्टी को 2014 में मिली हार के बाद 2019 में पार्टी को जीत दिलाने के लिए पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने खूब मेहनत की थी। लेकिन पार्टी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ था।  और कांग्रेस पार्टी 2014 की 44 सीटों के मुकाबले महज 52 सीटों पर सिमट गई, इतना ही नहीं खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए।

लेकिन अब फिर से कांग्रेस पार्टी ने भविष्य को सुनहरा बनाने की चाह में पार्टी का कमान राहुल से लेकर कमान सोनिया गांधी को सौंप दी हैं। सोनिया गांधी के कमान संभालते ही पार्टी के बड़े नेता पी.चिदम्बरम, डीके. शिवकुमार और अहमद पटेल के बेटे जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए।

लेकिन कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर मौका मिला और कांग्रेस समेत विपक्ष को पहले गिरते रुपये के बाद जीडीपी में भारी गिरावट का मुद्दा मिल गया। लेकिन कुछ कांग्रेस पार्टी जीडीपी में भारी गिरावट के विरोध में कुछ करती नजर नहीं आ रही हैं।

गौरतलब है कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी तब भी रुपया गिरा था और जीडीपी कमजोर हुई  थी। जिसका पूरा फायदा भारतीय जनता पार्टी ने उठाया था। और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मजबूत भूमिका निभाते हुए यूपीए सरकार को जमकर घेरा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय बतौर विपक्ष के नेता फ्रंटफुट पर आकर मनमोहन सरकार पर हमला किया था। तथा विपक्ष के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता धरना, प्रदर्शन, और आंदोलन कर रहे थे।

लेकिन अब कांग्रेस कुछ करती नजर नहीं आ रही है, हालांकि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस सियासत कहकर करती है, और राहुल गांधी विपक्षी नेताओं से चर्चा करके दौरा करने चले जाते हैं, यज जानते हुए भी कि देश की बड़ी आबादी इस मुद्दे पर कुछ और रुख रख रही है।

वहीं, जिस बेरोजगारी, गरीबी, किसान और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों से कांग्रेस और विपक्ष सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाते आए हैं, लेकिन जब यह मुद्दा सामने आया है तो पार्टी कोई विपक्षी एकता के लिए न कोई बैठक कर रही है, और न ही कोई आंदोलनकर रही हैं। जब जीडीपी गिरकर 5 फीसदी आ गई है, और कहीं ना कहीं आम जनता की जेब परइसका सीधा असर पड़ने वाला हैं।

लेकिन 2024 में सरकार बनाने का सपना संजोकर कांग्रेस और विपक्ष खामोश हैं। इस पर राहुल विपक्षी दलों के नेताओं से मिलकर कोई रणनीति बनाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। महज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का एक वीडियो संदेश जारी कर और ट्विटर पर बयान देकर पार्टी अपनी भूमिका पूरी कर देती है।

आखिर जनता के बीच जाकर विपक्ष की भूमिका कौन निभाएगा, या फिर विपक्ष अपनी सरकार बनाने का सपना संजोकर सत्ता में आने का सपना देखते रहेंगे।

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