मोदी सरकार के 100 दिन: विपक्षी नेता गए जेल तो कई नेताओं को तोड़कर पार्टी हुई मजबूत

  • by Yogesh
  • September 6, 2019

मोदी सरकार 2.0 के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल काफी एतिहासिक रहा है, इस कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई तेज हुई है, जहां भ्रष्टाचार में घिरे अफसरों को जहां जबरन रिटायरमेंट दिया गया तो वहीं नेताओं की गिरफ्तारियां हुई है।

मोदी सरकार 2.0 के शुरुआती 100 दिनों में सबसे बड़ी कार्रवाई कांग्रेस सरकार में गृह और वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम के खिलाफ हुई है, चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में तिहाड़ जेल में जाना पड़ा है, वहीं कर्नाटक के कद्दावर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है।

वहीं मोदी सरकार द्वारा इस 100 दिनों के कार्यकाल में लिए गए फैसलों पर गौर करें तो ऐसे कई एतिहासिक निर्णय लिए गए जिनके पूरे देश और दुनिया पर असर पड़ा, मोदी सरकार की इन उपलब्धियों में अनुच्छेद-370, तीन तलाक, सड़क सुरक्षा, आतंकवाद पर लगाम और बैंकों के विलय जैसे कई ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं।

टीडीपी के 4 राज्यसभा सांसदो को पार्टी में शामिल किया –

वहीं राज्यसभा में संख्या बल से कमजोर होने पर विधेयकों को पास कराने की राह में बीजेपी को दिक्कत आई तो भारतीय जनता पार्टी दूसरे दलों के कई राज्यसभा सांसदों को पार्टी में शामिल करने में सफल रही।

यही कारण रही कि आरटीआई और तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान अल्पमत में होने के बावजूद सरकार के पक्ष में ज्यादा सांसद खड़े नजर आए, विपक्ष के विरोध के बावजूद मोदी सरकार आरटीआई, तीन तलाक, UAPA सहित मनमुताबिक बिल पास कराने में सफल रही, राज्यसभा में अब बीजेपी के 78 सांसद हो चुके हैं।

वहीं मोदी सरकार 2.0 के 100 दिनों के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के विरोधी दलों के राज्यसभा सांसदों को भी पार्टी में शामिल करने में सफल रही, समाजवादी पार्टी इस प्रकार उत्तर प्रदेश राज्यसभा सीटों के चुनाव के बाद बीजेपी राज्यसभा में और मजबूत होगी।

इसके साथ ही मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर आर्थ‍िक मंदी गहराती ही जा रही है, ऑटो सेक्टर, रियल एस्टेट, टेलीकॉम, वित्तीय सेवाएं, बैंकिंग, स्टील, टेक्सटाइल, टी, डायमंड हर सेक्टर से नकारात्मक खबरें आ रही हैं, उत्पादन में कटौती हो रही है और नौकरियों की छटनी चल रही है, सरकारी और निजी खर्च नहीं बढ़ रहा, हाल में आए जून तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े चिंताजनक है, मंदी की प्रमुख वजहें घरेलू मांग में कमी, निवेश में कमी, ऑटो सेक्टर में सुस्ती, विनिर्माण गतिविधियों में गिरावट को माना जा रहा है।

हालांकि मोदी सरकार ने अगले 5 साल में देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि 5 फीसदी के आसपास की जीडीपी पर इसे हासिल करने असंभव है, इसके लिए सालाना 8 से 9 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *