धारा 370 के साथ ही क्या भारतीय जनता पार्टी ने लिख दी क्षेत्रीय दलों के अंत की इबारत?

  • by Yogesh
  • August 8, 2019

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को खत्म कर भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्रीय दलों पर एक कड़ा प्रहार किया है। माना जा रहा है कि बीजेपी द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करना क्षेत्रीय दलों के लिए घातक साबित होने वाला है। इससे आने वाले चुनावों में राष्ट्रवाद की लहर बढ़ेगी। जिससे आने वाले चुनावों में क्षेत्रीय दलों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।

2014 के हुए लोकसभा चुनावों में 7 राष्ट्रीय दलों को कुल 376 सीटें मिलीं थीं, लेकिन 2019 में कुल 542 सीटों पर हुए लोकसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों की 21 लोकसभा सीटें कम हो गईं। अगर क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व की बात  करें तो सिर्फ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख राज्यों में ही क्षेत्रीय दल अपने दम पर सत्ता में हैं। वहीं नागालैंड और सिक्किम में क्षेत्रीय दलों की सरकार एनडीए के सहयोग से चल रही है। वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है तो अन्य राज्यों में बीजेपी की सरकार हैं

गौरतलब है कि देश में महज शिरोमणि अकाली दल और जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस ही आजादी के पहले गठित हुए थे। जबकि अन्य क्षेत्रीय दल कांग्रेस की जड़ें 1967 से कमजोर होने के बाद बने हैं। फिलहाल देश में बीजेपी, कांग्रेस, बसपा, राकांपा, सीपीआई (एम), भाकपा, टीएमसी राष्ट्रीय पार्टी हैं। वहीं राज्यों में 35 मान्यता प्राप्त दल हैं। और क्षेत्रीय दलों की संख्या लगभग 329 है।

फिलहाल देश की राजनीति बड़े बदलाव से गुजर रही है, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से राष्ट्रीय एकता बडे़ बहस का मुद्दा बन गया है, और आने वाले चुनावों में झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनावों में इसकी झलक दिखेगी। तथा इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी कश्मीर को ही बड़ा मुद्दा बनाएगी।

धारा 370 पर संसद में चर्चा के दौरान जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रीय दल कम मुखर रहे, बसपा भी सरकार के साथ दिखी, देश के अन्य राज्यों के क्षेत्रीय दलों को भी लगता है कि जनमत के खिलाफ बोलने की उन्हें चुनावों में बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

हालांकि आने वाले चुनावों में मुस्लिम वोटबैंक पर राजनीति हो सकती है, क्योंकि जम्मू – कश्मीर मुस्लिम बाहुल्स क्षेत्र है, ऐसे में क्षेत्रीय दलों को लगता है कि अनुच्छेद 370 पर सरकार को सपोर्ट करने से मुस्लिम वोटों का नुकसान हो सकता है।

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