चुनाव-संवाद: कुछ लेखक संगठनों ने की देशवासियों से मोदी और बीजेपी को हराने की अपील

  • by Ashutosh Kumar Singh
  • April 15, 2019
देश में लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज़ हो चुका है। और ऐसे में राजनीतिक पार्टियों के साथ ही साथ देश के कई गैर-सरकारी संगठनों ने भी लोगों के सामने अपने अपने विचार प्रकट करने शुरू कर दियें हैं।
और इसी श्रृंखला में चार लेखक संगठनों, ‘जनवादी लेखक संघ’, ‘जन संस्कृति मंच’,  ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ और ‘दलित लेखक संघ’ ने देशवासियों से बीजेपी और मोदी सरकार को इन चुनावों में हराने की अपील की है।
लेखक संगठनों द्वारा जारी विज्ञप्ति

एक बार फिर आम चुनाव सामने हैं।

और ठीक पांच साल पहले जिन हाथों में केंद्र की सत्ता सौंपी गयी थी, उनकी जनविरोधी कारगुज़ारियाँ भी हमारे सामने हैं।

ये पांच साल इस देश के इतिहास में एक दु:स्वप्न की तरह याद किये जायेंगे। इन सालों में आरएसएस की विचारधारा वाले शासकों ने हिटलर और मुसोलिनी के नक़्शे-क़दम पर चलते हुए मुल्क को नफ़रत की आग में झोंक दिया। तर्क-विवेक की बात करने वाले लेखकों-कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुईं, उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर जेलों में बंद किया गया, उनका लिखना-बोलना बंद कराने की कोशिशें हुईं। कभी गोकशी तो कभी धर्म-परिवर्तन के नाम पर मुसलमानों पर जानलेवा हमले हुए; अखलाक़ से लेकर पहलू खान तक, न जाने कितने बेगुनाह नागरिकों को तथाकथित गोरक्षकों ने मौत के घाट उतार दिया। गोरक्षा के बहाने दलितों और आदिवासियों को भी हिंसा का निशाना बनाया गया। इन सब मामलों में आरएसएस की विचारधारा पर चलने वाली केंद्र और राज्य की सरकारों ने कहीं अपनी चुप्पियों से और कहीं बज़रिये पुलिस-प्रशासन, कहीं नौकरियाँ देकर और कहीं सम्मानित करके, जिस तरह संघी हत्यारों का साथ दिया, वह इस देश के अमनपसंद लोग कभी भूल नहीं सकते। वे कभी नहीं भूल सकते कि सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाकर आरएसएस ने देश के नागरिकों की निजी पसंद को भी, वह भोजन से सम्बंधित हो या जीवनसाथी के चुनाव से, अपने दकियानूस ख़यालात की बेड़ियों में जकड़ने की मुहिम छेड़ दी।

इन पांच सालों में जनसंचार माध्यमों की आज़ादी का गला घोंट दिया गया, उन्हें हिन्दुत्ववादी विचारधारा का भोंपू बना दिया गया। तमाम टीवी चैनलों को साम-दाम-दंड-भेद के बल पर रात-दिन सांप्रदायिक नफ़रत, अंधविश्वास, अज्ञान बढ़ाने वाले कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए मजबूर किया गया। जो पत्रकार अपना ईमान और अपनी आत्मा नहीं बेच पाये, उन्हें चैनलों से हटवा दिया गया ताकि सरकार के झूठे प्रचार की असलियत सामने न आ पाये।

सोर्स: समकालीन जनमत

इससे पहले भी महाराष्ट्र के लेखक समुदाय भी कर चुका है ऐसी अपील

दरसल कुछ बॉलीवुड कलाकारों और थिएटर आर्टिस्ट द्वारा ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ हेट’ के खिलाफ़ मतदान करने की अपील के बाद, महाराष्ट्र के 112 से अधिक लेखकों ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए लोगों से ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ हेट’ जैसी विचारधारा का प्रत्यक्ष  अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने वाली पार्टियों और ऐसे लोगों के खिलाफ़ मतदान करने की अपील की थी।

पिक्चर क्रेडिट: scroll.in

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