चीफ जस्टिस पर लगे यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना के आरोपों को लेकर हुआ एक और खुलासा

  • by Yogesh
  • April 22, 2019

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई यौन उत्पीड़न तथा प्रताड़ना के गंभीर आरोपों में घिर गए हैं।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने शीर्ष अदालत के 22 जजों को पत्र लिखकर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न तथा प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने आरोप लगाया हैकि जस्टिस गोगोई ने अक्टूबर 2018 में उनका यौन उत्पीड़न किया था। वहीं मिली जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय पीड़ित महिला 2018 में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थी। इस दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने उसका यौन उत्पीड़िन किया। इतना ही नहीं पीड़ित महिला ने चीफ जस्टिस पर आरोप लगाया है कि जब उसने गोगोई के आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध किया तो उन्हें, उनके पति और परिवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वहीं पीड़ित महिला ने अपने शिकायत पत्र में बताया कि

“11 अक्टूबर 2018 को सीजेआई के घर पर बने हुए दफ्तर में उसके साथ इस घटना को अंजाम दिया गया। पीड़िता ने आपबीती सुनते हुए बताया कि “उन्होंने मुझे कमर के दोनों ओर से पकड़कर गले लगाया और अपनी बाज़ुओं से मुझे पूरे शरीर पर छुआ, अपने को मुझ पर लाद कर मुझे जकड़ लिया, फिर उन्होंने कहा ‘मुझे पकड़ो’ मेरी उनकी जकड़ से निकलने की कोशिशों की बुत सरीखे हो जाने के बावजूद उन्होंने मुझे जाने नहीं दिया।”

वहीं पीड़िता ने बताया कि इसका विरोध करने के बाद उनका विभिन्न विभागों में तीन बार तबादला करा दिया गया। तथा दो महीने बाद दिसंबर 2018 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। वहीं पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें बर्खास्त करने को लेकर इन्क्वायरी रिपोर्ट में तीन कारण बताए गए, जिनमें से एक शनिवार को बिना अनुमति के कैज़ुअल लीव लेना था।

पीड़िता ने बताया कि उनके साथ उनके परिवार को भी इसका शिकार होना पड़ा। पीड़ित महिला ने बताया कि उनके पति और पति के भाई, को 28 दिसंबर 2018 को साल 2012 में कॉलोनी में हुए एक झगड़े को लेकर दर्ज हुए मामले के चलते निलंबित कर दिया गया। पीड़िता का पति तथा भाई दिल्ली में ही हेड कॉन्सटेबल के पद पर कार्यरत थे।

वहीं पीड़िता ने कहा कि  इस मामले में उनका समझौता हो चुका था। वहीं पीड़िता ने शिकायत की है कि  9 मार्च 2019 को राजस्थान में अपने पति के गांव से दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में पूछताछ करने के लिए पति, उनके पति के भाई, उनकी पत्नी और एक अन्य रिश्तेदार को तिलक मार्ग थाने में हिरासत में लिया। पीड़िता ने बताया कि उन पर आरोप था कि उन्होंने 2017 में शिकायतकर्ता से सुप्रीम कोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 50 हज़ार रुपये की रिश्वत ली थी। लेकिन नौकरी नहीं मिली। वहीं पीड़िता ने कहा है कि शिकायत में रिश्वत देने वाले शिकायतकर्ता का नाम नहीं है।

वहीं इस मामले को लेकर शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल ने इन आरोपों को फर्जी बताते हुए इनका खंडन किया है। सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि “इस महिला को नियमानुसार ही सेवाओं से बर्खास्त किया गया है।” सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि ‘सीजेआई के सचिवालय द्वारा सेक्रेटरी जनरल को महिला के अनुचित व्यवहार के बारे में शिकायत भेजी गई थी, जिसके चलते उनका तबादला किया गया। इस अनुचित व्यवहार की औपचारिक शिकायत के अलावा सचिवालय द्वारा महिला के कई और गलत व्यवहार के बारे में बताया गया था।’ हालांकि सेक्रेटरी जनरल ने इन्क्वायरी के एक तरफा होने के बारे में कोई जवाब नहीं दिया।

अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने इस मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया है। वकील उत्सव ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर कर बताया है कि एक अनजान युवक ने उन्हें 1.5 करोड़ रुपये की पेशकस दी है। इसके एवज में उन्हें उन्हें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की ऐसी जबरदस्त कहानी गढ़ने का ऑफर आया था। जिससे सीजेआई को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़े।

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