सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों का होगा प्री-सर्टिफिकेशन: चुनाव आयोग

  • by Ashutosh Kumar Singh
  • March 11, 2019

इस बात में कोई संशय नहीं कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे फेसबुक, ट्विटर इत्यादि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आज की राजनीति को काफ़ी प्रभावित करते हैं।

और शायद इसी के चलते कई राजनीतिक पार्टियों और संस्थाओं ने इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करना भी शुरू कर दिया है। लेकिन हाल ही में ऐसा देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने इसी दुरुपयोग से बचने के लिए कई कड़े कदम भी उठाए हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बीते कुछ समय से यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म राजनीतिक दुरुपयोग के चलते काफी विवादों में भी घिरे रहे।

और इसी से सीख लेते हुए इन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे Google और Facebook ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में राजनैतिक विज्ञापनों को लेकर पादर्शिता बरतने हेतु भी कई नियमों में बदलाव किया है।

और अब इसी कड़ी में भारतीय चुनाव आयोग भी इन प्लेटफ़ॉर्म पर राजनैतिक प्रचारों को लेकर सजग होता नज़र आ रहा है। इसी के चलते अब चुनाव आयोग ने यह फ़ैसला किया है कि वह सोशल मीडिया पर सभी राजनैतिक पार्टियों के चुनाव अभियानों की निगरानी करेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए बताया, 

“आदर्श आचार संहिता के सभी प्रावधान उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही सामग्री पर भी लागू होंगे।” 

“सोशल मीडिया पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों को पूर्व प्रमाणीकरण की आवश्यकता होगी। राजनीतिक उम्मीदवारों को भी नामांकन दाखिल करने के समय अपने सोशल मीडिया खातों का विवरण देना होगा।” 

इसके साथ ही एसएमएस या वॉयस संदेश, इलेक्ट्रॉनिक और रेडियो चुनाव विज्ञापनों के लिए भी पूर्व प्रमाणीकरण की आवश्यकता होगी।

साथ ही सोशल मीडिया पर विज्ञापनों के प्रचार पर होने वाले खर्च को अब चुनाव खर्च खाते में शामिल करना होगा। 

चुनाव आयोग के ये नए कड़े प्रावधान कितने ईमानदारी से माने जाते हैं यह तो वक़्त ही बताएगा। लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि यह कदम बढ़ते सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण हैं।

 

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