#चुनाव 2019: सोशल मीडिया और कुछ मीडिया चैनलों के आधार पर न बनायें राजनेताओं को लेकर अपनी धारणा?

  • by Ashutosh Kumar Singh
  • March 14, 2019

आज की राजनीति का मलतब मोटे तौर पर सोशल मीडिया में राजनेताओं या कार्यकर्ताओं द्वारा एक-दूसरे दल को ट्रोल करना मात्र ही रह गया है

इससे जो सबसे बड़ा नुकसान होता है, इन सब ट्रोल इत्यादि चीज़ों के बीच जनता तक एक परिपक्व राजनैतिक विचार नहीं पहुँच पा रहें हैं। और इससे पुरे देश की राजनीति और समाज को ही क्षति पहुँच रही है।

दरसल समझने वाली बात यह है कि आज लोगों को ट्रोल सबमें इतना उलझा दिया गया है कि लोगों का ध्यान अच्छी बातों की ओर जाता ही नहीं है। ये ट्रोल एक दूसरे के खिलाफ़ ऐसी धारणा बना देते हैं, जिससे कभी अगर ट्रोल किया गया शख्स कुछ ऐसी बात करें जो समाज के लिए लाभप्रद हो, तो उसपर भी हमारा ध्यान नहीं जाता है। 

इसके उदाहरण के तौर पर बात करें अगर राहुल गाँधी की तो हम देखेंगें कि हाल ही में पिछले कई भाषणों में भले ही राजनैतिक लाभ के लिए ही सही, लेकिन उनके भाषणों में भी राजनैतिक ‘परिपक्वता’ नज़र आने लगी है। और इस बात को कहीं भी प्रमुखता से रेखांकित नहीं किया जा रहा है। 

दरसल बात राहुल गाँधी के नाम को रेखांकित करने की नहीं, बल्कि बातों की है। जब भी राजनेता चुनाव के दौरान जनता को लुभाने और वोट माँगनें जाते हैं, तो अपने राजनैतिक लाभ के लिए ही सही पर अपने भाषणों में वह कई ऐसी बातें करते हैं, जो लोगों को सुननी चाहिए और ताकि उन्हें पता चले और जनता खुद भी कई मुद्दों को लेकर जागरूक हो सके। 

दरसल महज़ मीडिया की बातों या सोशल मीडिया में बढ़ते ट्रोल को आधार बना कर जनता के बीच बनी बनायीं स्क्रिप्ट पेश करना और सबसे बड़ी बात की जनता का आँखें बंद कर उस पर विश्वास कर लेना, बिल्कुल भी उचित नहीं है। 

वर्तमान समय में एक ही बात को बार बार अनेकों माध्यम से लोगों तक पहुँचाने पर लोग अक्सर उसी को सच मान लेते हैं। और साथ ही लोग तथ्यों को खंगालना तक नहीं चाहतें हैं, या फ़िर कहें तो उनके पास इसका समय ही नहीं होता। और इसीलिए आसानी से मिलने वाली इन चीज़ों को ही लोग सच मानना बेहतर समझते हैं।

इस लेख के जरिये हमारा मकसद किसी पार्टी या राजनेता का प्रचार करना नहीं, बल्कि लोगों तक इस धारणा को पहुँचाना है, की वह हर एक राजनेता के भाषणों को चुनावों के पहले ध्यान से सुने और हर नेता के भाषण के जरिये अपनी राजनीतिक समझ और हाल के मुद्दों से जुडें सभी के विचारों को जाने सुने और समझें। 

और बात राहुल गाँधी की हो या प्रधानमंत्री मोदी की, किसी को लेकर भी बिना तथ्यों या खुद के अनुभव के सोशल मीडिया के आधार पर अपनी धारणा न बना लें।

दरसल राहुल गाँधी का हाल ही मिएँ चेन्नई के एक कॉलेज में दिया गया भाषण काफी राजनैतिक परिपक्वता से भरा हुआ था। और बात राहुल गाँधी की नहीं उनकी बातों की है, जो शायद यह दर्शाती है कि ट्रोल से परे राजनैतिक परिवेश में उनकी परिपक्वता बढ़ रही है।  

इसके साथ ही इस बीच हमनें सोशल मीडिया के बढ़ते राजनैतिक प्रभाव को लेकर Aam Aadmi Party के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा चुनाव 2019 में नार्थ-ईस्ट दिल्ली से ‘आप’ के उमीदवार Dilip Pandey – दिलीप पाण्डेय से भी विशेष बात कीऔर उन्होनें बताया कि आखिर कैसे आज के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल राजनैतिक आयामों में किस – किस प्रकार से किया जा रहा है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *